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विभाग एकविसावा : सांचिन - ज्ञेयवाद
              
स्पिनोझा- (१६३२-१६७७) -हा डच तत्त्ववेत्ता आमस्टरडॅम येथें ज्यू कुटुंबात जन्मला. स्पिनोझाचा बाप सुखवस्तु व्यापारी होता. स्पिनोजाचें शिक्षण प्रथम ज्यू शिक्षकांपाशीं होऊन ज्यू धर्म व तत्त्वज्ञान यांची माहिती त्यास झाली. परंतु त्या काळांत सर्वत्र लॅटिन भाषेचें माहात्म्य असल्यामुळें मोठ्या प्रयत्नानें त्या भाषेचा अभ्यासहि त्यानें केला. लॅटिनभाषाप्रभुत्वामुळें सर्व अर्वाचीन शास्त्र व तत्त्वज्ञान यांच्या अध्ययनास, स्पिनोझास मार्ग मोकळा झाला, आणि डेकार्ट या नास्तिक तत्त्वज्ञाच्या ग्रंथाचा अभ्यास त्यानें केला. त्यामुळें तो नास्तिक व भौतिकवादी बनून ज्यू धर्मावरील त्याची श्रद्ध नष्ट झाली. त्याची मतें कळतांच ज्यू धर्मोपदेशकांना व धर्माधिकाऱ्यांनां मोठा क्रोध आला; व लांच व धाक  या दोहोंचा प्रयोग करून पाहून स्पिनोझा ऐकना तेव्हां त्याला धर्मबहिष्कृत करण्यांत आलें. त्याच्यावर मारेकरी घालण्यांत आले होते; त्यामुळें आमस्टरडॅम सोडून तो जवळच एका मित्राच्या घरीं रहावयास गेला. तेथे त्यानें एक तत्वज्ञान विवेचन क्लब बनविला, व आपलीं तत्त्वें तो मित्र-विद्यार्थी मंडळींपुढें मांडूं लागला. स्पिनोझानें दोन तीन ठिकाणी स्थलांतर केलें तरी त्याचा क्लब चालूच होता. त्यामध्यें तो डेकार्टचे ग्रंथ समजावून सांगत असे, व त्यासंबंधीं कांहीं पुस्तकें त्यानें प्रसिद्ध केलीं. त्यानें आपला धर्मशास्त्रमीमांसा हा ग्रंथ आपल्या शत्रुंनां भिऊन निनावी प्रसिद्ध केला व त्यात धर्मशास्त्र व तत्त्वज्ञान या दोहोंचें मुद्देसूद पृथक्करण त्यानें केलं. अर्थांतच या ग्रंथावर अतोनात टीका झाली. राज्यकर्त्यांनीं व धर्माधिकाऱ्यांनी चालविलेल्या छळाचीं अनेक उदाहरणें घडत असल्यामुळें स्पिनोझाचें राहणें व लेखन गुप्त ठिकाणींच चालू असे. नंतर त्यानें राजनितिशास्त्रावर ग्रंथ लिहून त्यांमध्यें कायदे व राज्यकारभार या विषयांवरील आपलीं मतें मांडली. स्पिनोझाचा स्वभाव अत्यंत शांत व राहणीं अत्यंत साधी व काटकसरीची असे. त्यांचें बहुतेक आयुष्य एकलकोंडें बसून विचारांत व लेखनांत चाललें होतें त्यामुळें त्याला लवकर क्षयरोग जडला; आणि १६७७च्या फेब्रुवारींत तो मरण पावला. स्पिनोझाचीं मतें पूर्ण ईश्वर वादी असून त्यांत कांहीं गोष्टी सृष्टिनियमात्मक व कांहीं गूढार्थक आहेत. त्याच्या तत्त्वज्ञानाच्या पंथाचा पाया म्हणजे एक अनंत मूलद्रव्य होय व जगांतील सर्व वस्तू त्यांचीं रूपें होत. विश्वोत्पत्तीचें आदिकरण अर्थात् ईश्वर होय. ईश्वर म्हणजे निसर्ग असा त्यानें सर्वत्र अर्थ मानिला आहे. स्पिनोझाच्या मुख्य ग्रंथांची नांवें येणेंप्रमाणें:-एथिक्स; ट्रॅक्टॅटस थिओलॅजिको पॉलिटिकस; ट्रॅक्टॅटस पॉलिटिकस.

   

खंड २१ : साचिन - ज्ञेयवाद  

 

 

 

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