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विभाग एकविसावा : सांचिन - ज्ञेयवाद
         
सेंगर उर्फ सैंगर राजवंश— क्षत्रियांच्या ३६ कुलांतील गौतम व शांडिल्य गोत्री एक. कांहींच्या मतें हा शातकर्णी (शालिवाहन) वंश होय व कांहींच्या मतें हा चंद्रवंशी अनु या राजाचा वंश होय. ॠष्यशृंग-शांता यांचा पुत्र चतुरंग हा या घराण्याचा मूळ पुरुष व भागलपूरच्या आसपासच्या अंगदेशाचा राजा होता. याच वंशांत कौंतेय कर्ण झाला होता. त्याच्या पूर्वी कांहीं काल या राजवंशाच्या दोन शाखा झाल्या होत्या. त्यांतहि एक कर्ण झाला होता, त्याचा नातू शतकर्ण म्हणून होता. त्याच्या वंशास पुढें शातकर्णी म्हणूं लागले. अंगदेशचें राज्य नामशेष झाल्यावर या वंशानें चेदि, राढ (कर्णसुवर्ण), पैठण (आंध्रभृत्य), सुराष्ट्र, माळवा, डाहल वगैरे देशांत राज्य केलें. या राढ (म्हणजे वरद्वान) देशच्या सिंहबाहु राजाच्या विजय नांवाच्या पुत्रानें ख्रिस्तपूर्व ५४३ व्या वर्षी लंकेंत सिंहल राजवंशाची स्थापना केली. शालिवाहन (पौराणिक) राजा हा पैठणच्या सेंगर ऊर्फ शातकर्णी राजवंशांत प्रमुख होऊन गेलां (इ. स. ७८). मालवांत जसराज (यशोधर्म इ. स. ५२९). गुजराथेंत गुहिल (मैत्रक ५५८) हे सेंगरवंशी होते. प्राचीन शुङ्ग व काठेवाडी आधुनिक संघड हें सेंगर होत असें म्हणतात. बुद्धाच्या पूर्वी डहारदेव म्हणून एका सेंगरराजावरून पश्चिम चेदि देशाला डहारदेव नांव पडलें व तत्रस्थ सेंगरांना डहारिया म्हणूं लागले. चंदेल्ल, हैहय या राजांच्या ताब्यांत चेदिदेश गेल्यावर सेंगरवंश दुसरीकडे गेला. व त्यांतील कर्णदेवानें यमुना-चर्मण्वतीसंगमाजवळ कर्णावती (कनार) शहर स्थापिलें. कर्णदेवाचें वंशज सांप्रतचे रीवा राज्यांतील बीछरहटा, नयागढ येथील ठाकूर होत. कनारचा राजा विशोकदेव हा कनोजच्या जयचंदाचा जांवई असून त्यानें वसिंद नांवाच्या एका नदीला सेंगर हें नांव दिलें होतें. बाबरच्या वेळीं याचा वंशज जगम्मनशाह यानें, कनार राज्य बुडाल्यानें जगम्मनपूर (संयुक्तप्रांत) येथें एक जहागिरी स्थापिली; ती सांप्रत विद्यमान असून तींत ५७ गांवें आहेत. संयुक्त प्रांतांत जालौन व इटावा या भागांत सेंगरवंशीय लहान जमीनदार बरेच आहेत. शिवगणपूर स्थापणारा शिवगणदेव याचा पुत्र शेलिचंद्र याचा दहावा वंशज भगवंतदेव (सुमारें इ. स. १६००) यानें मयूखकार नीलकंठभट्टाकडून भगवंतभास्कर हा ग्रंथ निर्माण केला. पंधराव्या शतकांत लखनेसर येथें या वंशाचें एक राज्य होतें, हल्लीं या जहागिरींत १०० गांवें आहेत. सिरौंज (माळवा) येथें या वंशाचें राज्य होतें. त्यांतील राजानें हुमायून यास शेरशहाविरुद्ध मदत केली होती; पुढें औरंगझेब यानें ही जहागीर भगवंतसिंह हाडा यास दिलीं. सांप्रत या वंशाची लो. सं. ८०/९० हजार असून ती संयुक्तप्रांत, राजपुताना, बिहार, मध्यप्रांत इकडे आहे. [कुंवर शिवनाथसिंह सेंगर—बिकारनेर, यांच्या लेखावरून].

   

खंड २१ : साचिन - ज्ञेयवाद  

 

 

 

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