प्रस्तावना खंड  

   

सूची खंड  

   
Banners
   

अक्षरानुक्रम (Alphabetical)

   

विभाग विसावा : वऱ्हाड - साचिन

शिसे- रासायनिक संज्ञा स. परमाणुभारांक २०७.१. ही धातु फार प्राचीन काळापासून माहीत आहे. रोमन लोक पाणी नेण्याकरितां शिशाचे नळ करीत असत. हरताळ (मुरदाड शिंग), शेंदूर सीससिरकीत हे पदार्थ इ.स. आठव्या शतकांत उपलब्ध होते. शिसें शुद्ध स्थितींत क्वचितच आढळतें. हें मुख्यत्वेंकरुन गॅलीना या खनिज द्रव्याच्या रुपानें ठिकठिकाणीं सांपडतें. याच्या खाणी इंग्लंड (डर्बीशायर, कंबरलंड, यॉर्कशायर, कॉर्नवाल इत्यादि ठिकाणीं), जर्मनी, ऑष्ट्रिया, स्पेन, अमेरिकेंतील संयुक्त संस्थानें, मेक्सिको, ब्राझिल व हिंदुस्थान या देशांत आहेत. १९०५ सालीं इंग्लंडांतून २५००० टन शिसें निघालें. त्याच सालीं स्पेन देशांतून १७९००० टन शिसें निघालें. अमेरिकेंतून३१९७४४ टन, व जर्मनींतून १५२५९० टन शिसें निघाले.

गॅलनापासून शुद्ध शिसें काढण्याची रीत फार सोपी आहे. गॅलीना हवेंत तापवितात म्हणजे त्यांतील गंधक जळून जातो व शिसें शिल्लक राहतें. शिशांत चांदीचा थोडा अंश असतो पण ही चांदी अलग करण्याचें  काम फार कठिण पण फार महत्वाचें आहे. पूर्वी शिसें एका कढईंत घालून त्यावरून  हवा जोरानें जाऊं देत असत. म्हणजे शिशाचा हरताळ होऊन चांदी शिल्लक रहात असे. याला पॅटिम्सन पद्धत म्हणतात. इस. १८४२ मध्यें दुसेरी पद्धत प्रचारांत आळी. चांदी व शिसें यांचें मिश्रण वितळवून त्यांत जस्त घालतात म्हणजे चांदी व जस्त यांचा मेल (ऍलोंय) बनतो. नंतर जस्त ऊर्ध्वपातनक्रियेनें उडवून देतात म्हणजे चांदी शिल्लक राहते. याला पार्कस पद्धत म्हणतात. शिसें पांढर्‍या रंगाचें असतें. व त्यावर निळया रंगाची झांक मारते. हें फार चकाकत नाहीं. कारण यावर नेहमीं गंज चढलेला असतो. हें फार मऊ असून वांकवितां येतें. याचें विशिष्टगुरुत्व ११.३ आहे. सेंटिग्रेडच्या ३२७ अंशांवर तें वितळतें व १५०० अंशांवर त्याची वाफ होते. उघडया हवेंत यावर गंज फार लवकर चढतो. शिसें प्राणवायूशीं दोन प्रकारांनीं संयोग पावतें; एक हरताळ; याचा रंगांत उपयोग होतो. व दुसरा शेंदूर (सिंदूर), सीसकर्बनित; याचा उपयोग तोंडाला रंग लावण्याकडे करतात. हा एक प्रकारचा सफेता आहे पण हा लवकर काळा पडतो. सीससिरकित साखरेप्रमाणें गोड असतें. शिसें किंवा त्याचें कोणतेंहि लवण विषारी आहे.त तें पोटांत गेल्यास लगेच पोटांत दुखूं लागतें व जुलाब होऊं लागतात. अशा वेळेस वांतीचीं औषधे द्यावीत व सिंधुगंधकित द्यावें. बहुधां जीं माणसें कांच, रंग, मातीचीं जिल्हईचीं भांडीं, चाकू, कात्र्या, ग्यासच्या व पाण्याच्या नळयांच्या कारखान्यांत असतात त्यांपैकीं पुष्कळांच्या पोटांत शिसें जाते व पुढें त्यांस रोग होतात. हिंदुस्थानांत शिशाची एकच महत्वाची खाण आहे. ती म्हणजे ब्रह्मदेशांतील बाडिनची होय. तींतून १९२३ सालीं १६८१८१११ रुपये किंमतीचें ४६०६० टन शिसें निघालें.

   

खंड २० : व-हाड - सांचिन  

 

 

 

  वलवनाड
  वल संस्थान
  वल्लभाचार्य
  वल्लभीचा मैत्रकवंश
  वल्लभ्
  वसई
  वसिष्ठ
  वसु
  वसुदेव
  वहना
  वहाबी
  वक्षनिदान
  वाई
  वाकाटक राजे
  वांकानेर संस्थान
  वांगारा
  वांग
  वाग्भट्ट
  वाघ
  वाघरी
  वाघांटी
  वाघेल राजे
  वाघोलीकर, मोरो बापूजी
  वाघ्या
  वाघ्रा
  वाचनालयें
  वाचस्पतिमिश्र
  वाचाभंग
  वांटप
  वाटल
  वाटाणा
  वाडाइ
  वाडें
  वाणी
  वात
  वात्स्यायन
  वांदिवाश
  वाद्यें
  वांद्रें
  वांबोरी
  वामदेव
  वामन
  वामन पंडित
  वामनस्थळी
  वायनाड
  वायलपाद
  वायव्य सरहद्द प्रांत
  वायुपुराण
  वायुभारमापक
  वायूचे रोग
  वारकरी पंथ
  वारली
  वारसा
  वार्सा शहर
  वालखिल्य
  वालपापडी
  वालपोल, होरेशिओ
  वालरस
  वालाजापेट
  वाली
  वाल्मिकि
  वाल्हें
  वाशिंग्टन
  वॉशिंग्टन, जॉर्ज
  वॉशिंग्टन, बुकर टी
  वाशिम
  वासवा
  वा संस्थानें
  वासुकि
  वासुदेव
  वासोटा
  वास्तुसौंदर्यशास्त्र
  वाहीक
  वाळवें
  वाळा
  विकर्ण
  विक्रमपूर
  विक्रमसंवत् व विक्रमादित्य
  विंचावड
  विचित्रवीर्य
  विंचू
  विंचूर
  विंचेस्टर
  विजयगच्छ
  विजयदुर्ग
  विजयादशमी
  विजयानगर
  विजयानगरचें घराणें
  विजयानगरम्
  विजापूर
  विझगापट्टम्
  विटेनबर्ग
  विठ्ठल कवी
  विठ्ठल शिवदेव विंचूरकर
  विठ्ठल सुंदर परशरामी
  विंडबर्ड बेटे
  विंडसर
  विणकाम अथवा विणणें
  वित्तेश्वर
  विदुर
  विदुला
  विदेह
  विद्याधर
  विद्यापीठें
  विद्युत्
  विंध्यपर्वत
  विनायकी लिपी
  विनुकोंडा
  विमा
  विमान
  विरपुर
  विरमगांव
  विरवन्नलूर
  विराट
  विल्यम राजे
  विल्यम्स, सर मोनीयर
  विल्लुपुरसम्
  विल्यन वुड्रो
  विल्सन, होरेस हेमन
  विल्हेल्म्स हॅवन
  विवस्वान्
  विवाह
  विवेकानंद
  विशाळगड किल्ला
  विशाळगड संस्थान
  विशिष्टाद्वैत
  विश्वकर्मा
  विश्वनाथ
  विश्वब्राह्मण
  विश्वसंस्था
  विश्वामित्र
  विश्वासराव पेशवे
  विश्वेदेव
  विश्वोत्पत्ति
  विश्वोत्पत्ति
  विषें व विषबाधा
  विष्णु
  विष्णु गोविंद विजापूरकर
  विष्णुदास नामा
  विष्णुपुराण
  विष्णुस्मृति
  विसनगर
  विसोबाखेचर
  विज्ञानशास्त्र
  विज्ञानेश्वर
  वीरपूर
  वीरवल्ली
  वीरशैव उर्फ लिंगायत
  वीरावळ
  वूलर सरोवर
  वूलवरहॅस्टन
  वूलिच
  वृत्तपत्रें
  वृत्तें
  वृत्र
  वृन्दसंगीत
  वृंदावन
  वृद्धाचलम्
  वृक्षसंवर्धन
  वेंगी देश
  वेंगुर्लें
  वेणूबाई
  वेत
  वेद
  वेदांत
  वेदारण्यम्
  वेद्द
  वेधशास्त्र
  वेरुळ
  वेलदोडे
  वेलन
  वेलबोंडी
  वेलस्टी रिचर्ड कॉली, मार्किंस
  वेलिंग्टन
  वेलिंग्टन, आर्थंर वेलस्ली
  वेल्लाळ
  वेल्लोर
  वेल्स
  वेश्याव्यवसाय
  वेस्टइंडिज बेटें
  वेस्ले, जॉन
  वैतरणी
  वैदु
  वैराट
  वैवस्वत मनु
  वैशंपायन
  वैशाली-विशाल
  वैशेषिक
  वैश्य
  वैष्णव संप्रदाय
  व्यंकटगिरी
  व्यंकटाध्वरी
  व्यंकोजी
  व्यापार
  व्यायाम
  व्रत
  व्हर्जिन बेटें
  व्हर्जिल
  व्हल्कन
  व्हिएन्ना
  व्हिक्टोरिया
  व्हिक्टोरिया निआंझा
  व्हिक्टोरिया फॉल
  व्हिलिंजस्
  व्हेनिस्
  व्हेनेझुएला
  व्हेपिन
  व्हेसुव्हियस
  व्होल्टा अल्सान्ड्रो
  व्होल्टेअर
 
  शक
  शंकराचार्य
  शंकुतला
  शकुनि
  शक्तिसंस्थान
  शंतनु
  शत्रुघ्न
  शनि
  शब्दवाहक
  शरीरसंवर्धन
  शर्मिष्ठा
  शल्य
  शस्त्रवैद्यक
  शहाजहान
  शहाजी
  शहामृग
  शाई
  शांघाय
  शांतीपूर
  शान
  शारीर व इंद्रियविज्ञानशास्त्र
  शारीरांत्र गूहकसंघ
  शार्लमन चार्लस दि ग्रेट
  शालिवाहन राजे
  शालिवाहन शक
  शासनशास्त्र
  शाहू थोरला
  शिकॅगो
  शिखंडी
  शिंगाडा
  शिगात्झे
  शिंदे घराणें
  शिंपी
  शिबि
  शिरपुर
  शिर:शोणित मूर्च्छा
  शिराझ
  शिरूर
  शिरोंचा
  शिलर, जोहान ख्रिस्तोप
  शिलाजित
  शिलाहार राजे
  शिल्पकला
  शिव
  शिवगंगा
  शिवगिरि
  शिवदीनबावा
  शिवाजी
  शिशुपाल
  शिसें
  शिक्षणशास्त्र
  शीख
  शुक
  शुक्र
  शुंग घराणें
  शुजा
  शुन:शेप
  शुंभ निशुंभ
  शुश्रूषा
  शूर्पणखा
  शूलगव
  शृंगवरप्पुकोटा
  शृंगेरी
  शेक्सपिअर विल्यम्
  शेख
  शेखमहंमद
  शेख सादी
  शेगांव
  शेडबाळ
  शेफिल्ड
  शेले, पर्सी बायशे
  शेष
  शेळ्यामेंढ्या
  शैवसंप्रदाय
  शोण अथवा शोणभद्रा
  शोपेनहार
  श्रवणबेळगोळ
  श्रीधरस्वामी
  श्रीनगर
  श्रीरंगम्
  श्रीविल्लीपुत्तूर
  श्रीवैकुंठम्
  श्रीशैलम्
  श्लीपदरोग
  श्लेगेल
  श्वासनलिकादाह
  श्वेतांबर जैन
  श्वेताश्वतरोपनिषद
 
 
  संकटकतनु
  संकरनाइनार्कोयिल
  संकेश्वर
  सक्कर
  सखारामबापू
  संख्यामीमांसा
  संग
  संगड
  संगमनेर
  संगमेश्वर
  सगर
  संगीतशास्त्र
  संग्रहणी
  संघड
  संघसत्तावाद
  सच्छिद्रसंघ
  संजय
  संजारी
  सतलज
  संताळ परगणे
  सती
  सत्नामी
  सत्पंथ
  सत्यभामा
  सत्यवान
  संत्री-मोसंबी
  सदानंद
  सदाशिव माणकेश्वर
  सदाशिवरावभाऊ पेशवे
  संदिला
  संदोवे
  संद्वीप
  संधिपाद
  संधिवातरोग
  सॅन फ्रान्सिको
  सन्निपातज्वर
  संपगांव
  संपथर
  संपात
  संपातचलन
  सपृष्ठवंश
  सप्तशृंगी
  सफीपूर
  संबलपूर
  संभळ
  संभाजी
  संभाजी आंगरे
  समरकंद
  समशेर बहादूर
  समाजशास्त्र
  समाजसत्तावाद
  समीकरणमीमांसा
  समुंद्री
  सम्पत्ति
  सम्राला
  सयाम
  संयुक्त संस्थानें
  सय्यद
  सरकेशियन लोक
  सरगोधा
  सरधन
  सरस्वती
  सरहिंद
  सरक्षक जकातपद्धति
  सरैकेला
  सर्प
  सर्वसिद्धि
  सर्वेश्वरवाद
  सर्व्हिया
  सॅलोनिका
  सवर
  संशयवाद
  ससराम
  ससा
  संस्कार
  संस्कृति
  सस्तनप्राणी
  सहकारी संस्था
  सहदेव
  सहवासी ब्राह्मण
  सहसवन
  सहारा
  सह्याद्रि
  साऊथ वेस्ट आफ्रिका
  साकारिन
  साकोली
  साक्रेटीस
  साखर
  सांख्य
  साग
  सांगला
  सांगली संस्थान
  सागैंग, जिल्हा
  सांगोलें
  साघलीन
  सांचिन

 

   

यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान निर्मित महत्वपूर्ण संकेतस्थळे  

   

पुजासॉफ्ट, मुंबई द्वारा निर्मित
कॉपीराइट © २०१२ --- यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान, मुंबई - सर्व हक्क सुरक्षित .