प्रस्तावना खंड  

   

सूची खंड  

   
Banners
   

अक्षरानुक्रम (Alphabetical)

   

 

ज्ञा नें द्रि यें व क ला.— मनुष्याच्या पंच ज्त्रानेंद्रियांशीं जर पूर्वोक्त सप्‍तकलांचा संबंध जोडला तर कित्येक इंद्रियांशीं कलेचा संबंधच नाहीं असें दिसून येईल :-

 पंचमूतें  साधन  इंद्रियें  कला
 आकाश  शब्द  कर्ण  गायन, काव्य.
 वायू  स्पर्श  त्वचा  ....
 तेज  रूप  नेत्र  चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला
 आप  रस  जिव्हा  ...
 पृथ्वी  गंध  नाक  ...

या कोष्टकावरून हें लक्षांत येईल की, केवळ दोनच इंद्रियांनीं वरील सातहि कला व्यापलेल्या आहेत. इतर इंद्रियांच्या व्यापारामध्यें कलेचा भाव कां नसावा, याचाहि थोडासा विचार अवश्य केला पाहिजे. जसे :-

 इंद्रियें  शास्त्रें   इंद्रियांचें कार्य
 कर्ण  शब्दशास्त्र  ऐकणें व ऐकिवणें
 त्वचा  कामशास्त्र  (स्वतः) उपभोग घेणें
 नेत्र  रूपशास्त्र  पहाणें व दाखविणें
 जिव्हा  सूपशास्त्र  (स्वतः) उपभोग घेणें
 नाक  सुगंधशास्त्र  (स्वतः) उपभोग घेणें

या पांच इंद्रियांचीं हीं मुख्य शास्त्रें आहेत. कामशास्त्र हें भोगाचें शास्त्र आहे, व भोग हा स्वतःच भोगावयाचा असतो. आपण भोग भोगीत असतां तो दुसर्‍यांस देतां येत नाहीं. सूपशास्त्राचेंहि असेंच आहे. उत्तम पक्वान्न तयार केलेलें असलें तरी सुद्धां तें एकाच वेळीं अनेकांनां उपभोगितां येत नाहींत. नाकानें वास घ्यावयाचा असतांहि असाच प्रकार होतो. म्हणजे ह्या तीन इंद्रियांचे विषय समुदायाला एकसमयावच्छेदेकरून ग्रहण करणें अशक्य आहे. पण शब्दशास्त्र व रूपशास्त्र यांचें तसें नाहीं. एका वेळींच एका चित्राचें निरीक्षण करून हजारों लोक जसे आनंदाचे भागी होऊ शकतील त्याचप्रमाणें एकाच वेळीं काव्यश्रवणानेंहि हजारों मनुष्य तल्लींन होऊं शकतील. म्हणून मनुष्याचें मनुष्यत्व राखण्यास व वाढविण्यास जशीं ही दोन (कर्ण व नेत्र) इंद्रियें कारण होत असतात, त्याप्रमाणें इतर इंद्रियें नसतात. मनुष्याचें मनुष्यत्व ''सांघिक जीवनानें'' विकसित होणारें आहे. म्हणून ज्यांच्या योगानें संघभावाला प्रोत्साहन मिळतें, अशा दोनच इंद्रियांशीं संबंध ठेवणार्‍या हुन्नरांनां 'ललितकला' असें समजण्यांत येत आहे. यासाठींच चित्रकलेचा अध्यात्मिक दृष्टीनें अत्यंत उपयोग होणें शक्य आहे असें सध्यां समजलें जातें. कारण अध्यात्मिक दृष्टि झाली तरी सामुदायिक दृष्टीच होय.  

एकटाच जिचा उपभोग घेऊं शकतो ती कांहीं ललितकला नव्हे तर जिचा अनेक माणसें एकसमयावच्छेदेंकरून आस्वाद घेऊं शकतात तीच ललितकला होय. या दृष्टीनें सुग्रणपणा हा गुण कांहीं कलेमध्यें परिणत होऊं शकत नाही. वरील सात कला ह्या अशा दृष्टीनेंच कला आहेत. त्यांच्यामधील माधुर्य एकाहून अधिक माणसें एका वेळीं सुद्धं घेऊं शकतात व तें माधुर्य घेतल्यानंतर सुद्धं तें जसेंच्या तसेंच त्या मूळ कृतींमध्यें कायम असूं शकतें. एका चित्रकारानें काढलेलें चित्र हजार माणसांनी पाहिलें व त्यांतील आनंद घेतला, तरी त्या चित्राचा गुण कोणत्याच रीतीनें कमी होत नाही. म्हणूनच चित्रकलेला 'ललितकला' असें म्हणतात.

'पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥'
शतपथ ब्रा. १४.८,१.

'पूर्णाचें पूर्णत्व घेतलें तरी पूर्णच शिल्लक राहतें.' चित्रांतील सर्व सौंदर्य अनेकांनीं अनुभवलें किंवा उपभोगिलें तरी तें जसेंच्या तसेंच भूकचित्रांत कायम असतें; म्हणूनच आलेख्य ही ललितकला आहे.

   

खंड १३ : घ - जलपैगुरी  

 

 

 

  घंटय्याकवि
  घटोत्कच
  घटोत्कच लेणीं
  घड्याळ
  घनी
  घनौर
  घांट
  घाटगे
  घाटाळ
  घातमपूर
  घानची
  घायपात
  घारगड किल्ला
  घारघोडा
  घारापुरी
  घाशीराम कोतवाल
  घांसदाणा
  घासी
  घिरथ
  घिसाडी
  घुगुस
  घुंड
  घुबड
  घुराम
  घेरिया
  घेवडा
  घोटकी
  घोडबंदर
  घोडा
  घोडाघांट
  घोडाबारी
  घोडासर
  घोडें
  घोडेघांस
  घोरपड
  घोरपडी
  घोरपडे
  घोरी घराणें
  घोशी
  घोसाळे
  घोसी
  घोळ
 
 
  चउमू
  चकमा
  चकला रोषनाबाद
  चकवाल
  चकिया
  चक्कियर
  चक्कीनोआरो
  चक्रपाणि
  चक्रवर्ती
  चक्राप्पा
  चंगनाचेरी
  चंगर
  चच, चचनामा
  चचान
  चटया
  चडार
  चंडी
  चतुरमहाल
  चतुर साबाजी
  चतुरसिंग
  चतुर्थ
  चत्रा
  चॅथॅम
  चंदगड
  चंद घराणे
  चंदन
  चंदभाट
  चंदरभान
  चंदावरकर, नारायण गणेश
  चंदासाहेब
  चंदीपुर
  चंदेरी
  चंदेल्ल
  चंदौली
  चंदौसी
  चंद्र
  चंद्रकोना
  चंद्रगिरी
  चंद्रगुप्त
  चंद्रगोमिन्
  चंद्रनगर
  चंद्रभागा
  चंद्रहास
  चंद्रावती अथवा चंद्रावली
  चन्नगिरी
  चन्नपट्टण
  चन्नबसव
  चन्नरायपट्टण
  चंपा
  चंपानेर
  चपारण
  चंपावत
  चंपाषष्ठी
  चंबळा नदी
  चबा संस्थान
  चमारडी
  चरक
  चरखा
  चरखारी
  चरणदासी
  चरणव्यूह
  चरबी
  चरबीचें झाड
  चरी
  चर्मण्वती
  चलत-चित्रें
  चलन
  चल्लाकेरे
  चवळी
  चहा
  चक्षुर्मंनु
  चाकण
  चाकवत
  चागई
  चांगदेव
  चांगभकार
  चांगा केशवदास
  चाघताइखान
  चांचेगिरी
  चाचो
  चांडोद
  चाणक्य
  चातुर्मास्य
  चातुर्मास्य याग
  चातुर्वर्ण्य
  चात्सु
  चादचा
  चांदपूर
  चांदबिबी
  चांदभाट
  चांदला
  चांदवड
  चांदा
  चांदूर
  चांदूर बाजार
  चांद्रायण
  चानन शानन
  चानस्मा
  चानाल
  चानोड
  चाप्रा
  चाफळ
  चाबुआ
  चांभार
  चाम
  चामखीळ
  चामन
  चामराजनगर
  चामुंड
  चामुर्शी
  चार
  चारखा
  चारण
  चारदुआरं
  चारसद
  चारा
  चारीकार
  चार्टिझम
  चार्लंमांट, अर्ल ऑफ
  चार्वाक
  चालुक्य घराणें
  चालसिस
  चावडा
  चावंद
  चास-कमान
  चॉसर
  चासा
  चाहमान उर्फ चौहान
  चाळिसगांव
  चिक
  चिकंजी
  चिकबळ्ळापूर
  चिकाकोल
  चिकोडी
  चिक्कणर्ति
  चिक्केरूर
  चिक्टीआबर
  चिक्नायकन्हळ्ळी
  चिक्मगळूर
  चिखलदरा
  चिखली
  चिंगलपट
  चिंच
  चिचगड, जमीनदारी
  चिंचलीगदड
  चिंचवड
  चिचेवाडा
  चिंचौली
  चिंच्यु
  चिटणीस
  चितलनगर जमीनदारी
  चितळ
  चितळदुर्ग
  चिताकुल
  चिंतामणी
  चिंतामणी कवि
  चिंतामणी रघुनाथाचार्य
  चितारी
  चिति
  चितोड
  चित्तगांग
  चित्तगांग डोंगराळ प्रदेश
  चित्ता
  चित्तूर
  चित्फिरोझपूर
  चित्रकला
  चित्रकाव्य
  चित्रकूट
  चित्रकोट
  चित्रगुप्त
  चित्ररथ
  चित्रसंग्रहालयें
  चित्रळ
  चित्रांगदा
  चित्रावाव
  चिदंबर दीक्षित
  चिदंबरम्
  चिंदविन
  चिंदविन नदी
  चिदानंद स्वामी
  चिनडोंगर
  चिनमुलगुंद
  चिन लोक
  चिनसुरा
  चिनाब
  चिनीमाती किंवा केओलिन
  चिन्नविरन्ना
  चिन्नूर
  चिन्योत
  चिपळूण
  चिपळूणकर, कृष्णशास्त्री
  चिपळूणकर, विष्णुशास्त्री
  चिफू
  चिमणाजीआप्पा
  चिमणाजी दामोदर
  चिमणी
  चिरक्कल
  चिराबा
  चिलखत-वेदकालांतहि
  चिलिअनवाला
  चिली
  चिल्का सरोवर
  चिस्ती
  चीझी, अॅंटोनें लिओनार्ड डि
  चीन
  चीनी
  चीपुरुपल्ले
  चीर
  चीराल
  चुका
  चुकचि
  चुटिया
  चुडा
  चुडा संस्थान
  चुडेश्वर
  चुना
  चुनार
  चुंबकजन्य विद्युद्यंत्र
  चुंबकत्व
  चुंबकीय दृकशास्त्र
  चुंबन
  चुमल्हारी
  चुरू
  चूडामण
  चेकोस्लोव्हेकिया
  चेंगीझखान
  चेचेंझे
  चेटवई
  चेट्टी
  चेदूब बेट
  चेंबर्स रॉबर्ट
  चेयूर
  चेर घराणें
  चेरात
  चेरापुंजी
  चेरिअल
  चेरुमन
  चेरो
  चेर्रा
  चेल
  चेसेलडेन, विल्यम
  चेस्टरफील्ड
  चेस्टरफील्ड फिलिफ
  चैतन्य
  चैतसिंग
  चैत्य
  चैन
  चैबासा
  चोखामेळा
  चोवो
  चोडवरम
  चोध्रा
  चोपडे
  चोपदार
  चोबारी
  चोंभा
  चोरांग्ल
  चोरासी
  चोरी
  चोल
  चोल घराणें व चोल साम्राज्य
  चोवीस परगणा जिल्हा
  चौंगू
  चौघाट
  चौथाई, चौथ
  चौधरी
  चौबे जहागीर
  चौल
  चौलमुग्रा
  च्यवन
 
  छछरौली
  छट्टू
  छतारी
  छत्तरपूर
  छत्तिसगड विभाग
  छत्रपूर तहशील
  छत्रसाल
  छत्रे, केरो लक्ष्मण
  छत्रे, विष्णु मोरेश्वर
  छत्रे, सदाशिव काशीनाथ
  छंद:शास्त्र
  छप्पन देशचे राजे
  छप्रौली
  छब्रा
  छलाल
  छात
  छापखाना
  छापिआ
  छाप्री
  छायाचित्रपेटिका
  छाल
  छालिअर
  छिंद, लल्ल
  छिंदवाडा
  छिंपा
  छिब्रामऊ तहसील
  छुईखदान
  छुटिया
  छोटा उदेपूर
  छोटानागपूर
  छोटी साद्री
 
  जकात
  जॅक्सन अॅंड्र
  जॅक्सन व्हिल्ले शहर
  जखमा
  जगजीवनदास
  जगत्याल
  जगदलपूर
  जगदीशपूर
  जगन्नाथ
  जगन्नाथपंडित
  जगन्नाथपुरी
  जगन्नाथ शंकरशेट, मुर्कुटे
  जंगम
  जगय्या पेटा
  जंगल
  जंगल महाल
  जगलूर
  जगाध्री
  जग्रांव
  जंगीपूर
  जघाशूल
  जंजिरा
  जझिया
  जटलंड
  जटामांसि
  जटायु
  जटासूर
  जठरदाह
  जठरव्रण
  जडजीवघाद
  जडद्रव्य
  जडभरत
  जडवाद
  जडान्नविषबाधा
  जडावाचें काम
  जत
  जतिंग रामेश्वर
  जंतुजन्य रोग
  जतोई
  जत्रा
  जंदिआल गुरु
  जंदिआला
  जंदोला
  जनक
  जनजसवंत
  जननेंद्रियांचे गुप्तरोग
  जनमेजय
  जनस्थान
  जनाबाई
  जनार्दनस्वामी
  जनावरें
  जनीजनार्दन
  जपान
  जपानी वार्निस
  जबलपुर
  जंबुकेश्वरस्
  जंबुद्वीप
  जबूसर
  जमखिंडी
  जमदग्नि
  जमरुड
  जमाखर्च
  जमाबंदी
  जमालखान
  जमालपुर
  जमिकुंता
  जमीन
  जमीनदार व कुळें
  जमीनमहसूल
  जमुई
  जमेका
  जमेसाबाद
  जम्नोत्री
  जम्मलमडुगु
  जम्मू
  जयगड
  जयचंद
  जयदेव
  जयद्रथ
  जयनगर
  जयपाल
  जयपूर
  जयपुर जमीनदारी
  जयपुर संस्थान
  जयमल्ल
  जयरथ शृंगार
  जयरामस्वामी
  जयरामात्मज
  जयविजय
  जयसिंह
  जर उतणें
  जरतार
  जरत्कारु
  जरदाळू
  जरा
  जरासंघ
  जरीपटका
  जर्मन सिल्व्हर
  जर्मनी
  जलंगी
  जलजन्य विद्युतशक्ति
  जलघा
  जलपैगुरी

 

 

   

यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान निर्मित महत्वपूर्ण संकेतस्थळे  

   

पुजासॉफ्ट, मुंबई द्वारा निर्मित
कॉपीराइट © २०१२ --- यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान, मुंबई - सर्व हक्क सुरक्षित .