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विभाग तेरावा : घ - जलपैगुरी

घटोत्कच - पांडवांतील भीमसेनापासून हिडिंबा राक्षसीच्या ठायीं झालेला पुत्र. लाक्षागृहप्रसंगानंतर याचा जन्म झालेला आहे. हा जन्मला त्यावेळीं याचें मस्तक घटाप्रमाणें मोठें असून त्यास केस अगदीं नव्हते म्हणून याचें घटोत्कच असें नांव पडलें. याशिवाय पितृमातृसंबंधानें याला भैम्य, भैमसेनि, हैडिंब, हैडिंबेय, अशींहि नांवें असत. यास अंजनपर्वा आणि मेघवर्ण असे दोन पुत्र होते.

घटोत्कच नेहमी आपल्या मातेजवळच राही. पांडवांजवळ रहात नसे, म्हणून तो मोठा झाला असतां हिडिंबानें त्याकडून गुप्त-प्रकट होणें, पाहिजें तेव्हां, पाहिजे तें व जेवढें पाहिजे तेवढें रूप धरणें, इ. अनेक राक्षसी विद्यांचा (मायेचा) अभ्यास करविला होता. पांडव वनवासांत असतां तीर्थयात्रा करीत हिंडतेवेळीं त्यांस हिमालयाच्या गंधमादन शिखरावर जाण्याचा प्रसंग आला. तेव्हां चढतां चढतां भीमाखेरीज बाकीची मंडळी थकली. भीमसेन हा पांडवांस जरी नेण्यास समर्थ होता. तरी ॠषींसहित सर्वांस नेण्यास नव्हता. त्यानें घटोत्कचाचें स्मरण केलें. त्यावेळीं हा तेथें गेला व सर्वांस गंधमाली पर्वतावर नेऊन नरनारायणाश्रमीं सोडलें. बलरामाची वत्सला  म्हणून कन्या होती ती अभिमन्यूस देऊं केली असतां पांडव राज्यष्टभ्र झालें असें पाहून दुर्योधनाच्या विनंतीवरून बलरामानें दुर्योधनपुत्र लक्ष्मणाशीं तिचें लग्न ठरविलें. तेव्हां अभिमन्यूनें हें वृत्त कळवून तिचा विवाह आपणाशीं होण्याबद्दल याचें साहाय्य मागितलें त्यावरून यानें अभिमन्यूस द्वार केस नेऊन कौरवांची कृष्णांनुमतें दुर्दशा करून वत्सलेचा विवाह अभिमन्यूशीं केला.  (जैमिनीकृत भारत).

हा भारती युध्दांत पांडवांकडे होता. त्याचें शरीर भयंकर व धिप्पाड होतें. याच्या रथास आठ चाकें व शंभर घोडे असत. याचा ध्वज गृघ्र पक्ष्याचा असून याचें धनुष्य पौलस्त्य नांवाचें होतें.

द्रोण सेनापति असतां जयद्रथवध झाला तेव्हां दुर्योधनानें द्रोणाची निर्भत्सना केल्यानें द्रोणानें त्या दिवशीं रात्रींहि युध्द चालू ठेवलें. त्यावेळीं कर्णानें पांडवांच्या सैन्याचा फार संहार केला. त्याच्यावर अर्जून चालून जात असतां कृष्णानें त्याचें निवारण करून  (कारण कर्णाजवळ वासवी शक्ति होती व ती ज्याच्यावर फेंकली जाईल व त्याचा निपांत होईल असा तिचा गुण होता, म्हणून अर्जुनाचा बचाव व्हावयासाठीं) घटोत्कचास कर्णावर पाठविलें. त्यानें अनेक माया प्रगट करून  व राक्षसीपध्दतीनें युध्द करून कर्णास जर्जर केलें. शेवटीं प्राणावर येऊन बेतल्यानंतर ज्या वासवीस केवळ अर्जुनासाठींच इतकीं वर्षे जपून ठेवलें होतें ती कर्णानें घटोत्कचावर सोडली. ती अमोघ असल्यानें तिनें घटोत्कचाचा प्राण घेतला. मरतां मरतां घटोत्कचानें विशाल देह धारण करून कौरवसैन्यांत आपल्या देहाचें विसर्जन केलें. त्याच्या त्या देहाखालींहि बरेच लोक चिरडले गेले असें वर्णन कवीनें केलें आहे. (महाभारत, आदि.अ.१५५; वन. अ.१५५; वन अ १४५; द्रोण. अ २३; १७४-१७९).

   

खंड १३ : घ - जलपैगुरी  

 

 

 

  घंटय्याकवि
  घटोत्कच
  घटोत्कच लेणीं
  घड्याळ
  घनी
  घनौर
  घांट
  घाटगे
  घाटाळ
  घातमपूर
  घानची
  घायपात
  घारगड किल्ला
  घारघोडा
  घारापुरी
  घाशीराम कोतवाल
  घांसदाणा
  घासी
  घिरथ
  घिसाडी
  घुगुस
  घुंड
  घुबड
  घुराम
  घेरिया
  घेवडा
  घोटकी
  घोडबंदर
  घोडा
  घोडाघांट
  घोडाबारी
  घोडासर
  घोडें
  घोडेघांस
  घोरपड
  घोरपडी
  घोरपडे
  घोरी घराणें
  घोशी
  घोसाळे
  घोसी
  घोळ
 
 
  चउमू
  चकमा
  चकला रोषनाबाद
  चकवाल
  चकिया
  चक्कियर
  चक्कीनोआरो
  चक्रपाणि
  चक्रवर्ती
  चक्राप्पा
  चंगनाचेरी
  चंगर
  चच, चचनामा
  चचान
  चटया
  चडार
  चंडी
  चतुरमहाल
  चतुर साबाजी
  चतुरसिंग
  चतुर्थ
  चत्रा
  चॅथॅम
  चंदगड
  चंद घराणे
  चंदन
  चंदभाट
  चंदरभान
  चंदावरकर, नारायण गणेश
  चंदासाहेब
  चंदीपुर
  चंदेरी
  चंदेल्ल
  चंदौली
  चंदौसी
  चंद्र
  चंद्रकोना
  चंद्रगिरी
  चंद्रगुप्त
  चंद्रगोमिन्
  चंद्रनगर
  चंद्रभागा
  चंद्रहास
  चंद्रावती अथवा चंद्रावली
  चन्नगिरी
  चन्नपट्टण
  चन्नबसव
  चन्नरायपट्टण
  चंपा
  चंपानेर
  चपारण
  चंपावत
  चंपाषष्ठी
  चंबळा नदी
  चबा संस्थान
  चमारडी
  चरक
  चरखा
  चरखारी
  चरणदासी
  चरणव्यूह
  चरबी
  चरबीचें झाड
  चरी
  चर्मण्वती
  चलत-चित्रें
  चलन
  चल्लाकेरे
  चवळी
  चहा
  चक्षुर्मंनु
  चाकण
  चाकवत
  चागई
  चांगदेव
  चांगभकार
  चांगा केशवदास
  चाघताइखान
  चांचेगिरी
  चाचो
  चांडोद
  चाणक्य
  चातुर्मास्य
  चातुर्मास्य याग
  चातुर्वर्ण्य
  चात्सु
  चादचा
  चांदपूर
  चांदबिबी
  चांदभाट
  चांदला
  चांदवड
  चांदा
  चांदूर
  चांदूर बाजार
  चांद्रायण
  चानन शानन
  चानस्मा
  चानाल
  चानोड
  चाप्रा
  चाफळ
  चाबुआ
  चांभार
  चाम
  चामखीळ
  चामन
  चामराजनगर
  चामुंड
  चामुर्शी
  चार
  चारखा
  चारण
  चारदुआरं
  चारसद
  चारा
  चारीकार
  चार्टिझम
  चार्लंमांट, अर्ल ऑफ
  चार्वाक
  चालुक्य घराणें
  चालसिस
  चावडा
  चावंद
  चास-कमान
  चॉसर
  चासा
  चाहमान उर्फ चौहान
  चाळिसगांव
  चिक
  चिकंजी
  चिकबळ्ळापूर
  चिकाकोल
  चिकोडी
  चिक्कणर्ति
  चिक्केरूर
  चिक्टीआबर
  चिक्नायकन्हळ्ळी
  चिक्मगळूर
  चिखलदरा
  चिखली
  चिंगलपट
  चिंच
  चिचगड, जमीनदारी
  चिंचलीगदड
  चिंचवड
  चिचेवाडा
  चिंचौली
  चिंच्यु
  चिटणीस
  चितलनगर जमीनदारी
  चितळ
  चितळदुर्ग
  चिताकुल
  चिंतामणी
  चिंतामणी कवि
  चिंतामणी रघुनाथाचार्य
  चितारी
  चिति
  चितोड
  चित्तगांग
  चित्तगांग डोंगराळ प्रदेश
  चित्ता
  चित्तूर
  चित्फिरोझपूर
  चित्रकला
  चित्रकाव्य
  चित्रकूट
  चित्रकोट
  चित्रगुप्त
  चित्ररथ
  चित्रसंग्रहालयें
  चित्रळ
  चित्रांगदा
  चित्रावाव
  चिदंबर दीक्षित
  चिदंबरम्
  चिंदविन
  चिंदविन नदी
  चिदानंद स्वामी
  चिनडोंगर
  चिनमुलगुंद
  चिन लोक
  चिनसुरा
  चिनाब
  चिनीमाती किंवा केओलिन
  चिन्नविरन्ना
  चिन्नूर
  चिन्योत
  चिपळूण
  चिपळूणकर, कृष्णशास्त्री
  चिपळूणकर, विष्णुशास्त्री
  चिफू
  चिमणाजीआप्पा
  चिमणाजी दामोदर
  चिमणी
  चिरक्कल
  चिराबा
  चिलखत-वेदकालांतहि
  चिलिअनवाला
  चिली
  चिल्का सरोवर
  चिस्ती
  चीझी, अॅंटोनें लिओनार्ड डि
  चीन
  चीनी
  चीपुरुपल्ले
  चीर
  चीराल
  चुका
  चुकचि
  चुटिया
  चुडा
  चुडा संस्थान
  चुडेश्वर
  चुना
  चुनार
  चुंबकजन्य विद्युद्यंत्र
  चुंबकत्व
  चुंबकीय दृकशास्त्र
  चुंबन
  चुमल्हारी
  चुरू
  चूडामण
  चेकोस्लोव्हेकिया
  चेंगीझखान
  चेचेंझे
  चेटवई
  चेट्टी
  चेदूब बेट
  चेंबर्स रॉबर्ट
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